"Samajdar Ho Gye ?" By Harsh Mengi



परिंदे सोच मे हैं, 
कि ये सारे इंसान कहाँ खो गए,
ये तो हमे कैद किया करते थे,
अब खुद क्यों कैद हो गए ,
अब तो पर्यावरण भी कितना सुहाना है,
तो फिर क्यों ये अपने घरों के मोहताज हो गए,
लगता है कुछ तो बड़ा हुआ है,
तभी तो सब शहर गहरी नींद में सो गए,
इनके कैद होने  से ये नदियाँ,झरने,हवा सब साफ हो गए,
इंसानों को किसी का डर है या सब समझदार हो गए !


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